तैलंग स्वामीसे प्रभावित होकर नेपालनरेश उनके पास सत्संग के लिए आए, उसके कुछ अंश -
गणपति(तैलंग) स्वामी का आकर्षण पुनः तीसरे दिन (नेपाल)नरेश को उनके यहाँ खींच लाया । नरेश के बैठते ही गणपति स्वामी ने कहा- "राजन्, बहुत चंचल दिखाई दे रहे हैं । मन की चंचलता दूर करने के लिए प्रातः और सायं आधा घण्टा स्थिर होकर निश्चिन्त भाव से बैठना पड़ेगा । कुछ दिनों तक यह अभ्यास करते रहोगे तो मन में स्थिरता उत्पन्न होगी । इसके बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाना । मन के स्थिर हो जाने पर एक प्रकार का आनन्द अनुभव करोगे ।"
~ योगिराज तैलंगस्वामी पुस्तक, विश्वााथ मुखर्जी द्वारा लिखित
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